एमपीडी–2047 के तहत दिल्ली में फार्महाउस ज़मीन
एमपीडी–2047 लागू होते ही दिल्ली की लो-डेन्सिटी बेल्ट में फार्महाउस ज़मीन के नियम बदल गए। न्यूनतम प्लॉट एरिया, सड़क की चौड़ाई, ग्राउंड कवरेज और हरित आवरण — सब बदले हैं, और बाज़ार में घूम रही काफ़ी जानकारी अब भी ड्राफ़्ट के दौर की है। यह ख़रीदार गाइड अधिसूचित पाठ से लिखी गई है।
फार्महाउस ज़मीन कहाँ है
दिल्ली में फार्महाउस ज़मीन लगभग पूरी तरह उसी दायरे में आती है जिसे एमपीडी–2047 अब लो-डेन्सिटी एरिया कहता है — 70 राजस्व गाँवों की बेल्ट, लगभग 150 वर्ग किमी, जो पुराने लो-डेन्सिटी रेज़िडेंशियल एरिया और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा के सीमावर्ती गाँवों को मिलाकर बनी है।
दक्षिण में इसका मतलब है छतरपुर, सतबरी, सुल्तानपुर, जौनापुर, गदईपुर, चंदन हौला, फतेहपुर बेरी, असोला, भाटी, घिटोरनी, रंगपुरी, महरौली, रजोकरी और समालखा। उत्तर में बकोली, हिरनकी, होलंबी खुर्द और बख्तावरपुर। इनके अलावा ज़ोन जी, जे, के-II, एल, एन, पी-I, पी-II और ई में फैले 47 सीमावर्ती गाँव।
इस बेल्ट के बारे में दो बातें आगे की हर बात को आकार देती हैं, और दोनों को बिक्री की बातचीत में अक्सर टाल दिया जाता है:
- "गाँव" का मतलब राजस्व गाँव की सीमा है। प्लान यह साफ़ कहता है। यह उस बस्ती से कहीं बड़ा इलाक़ा है जिसकी तस्वीर गाँव का नाम सुनकर ज़्यादातर लोगों के मन में बनती है — और नियंत्रण उसी बड़ी सीमा का चलता है।
- यह बेल्ट एक जैसी नहीं है। पाँच गाँवों पर उच्चतम न्यायालय के आदेशों से उपजी शर्तें लागू हैं। कई गाँवों पर रीजनल पार्क की कटौती है, जहाँ लो-डेन्सिटी डेवलपमेंट केवल रीजनल पार्क से बाहर के हिस्सों में हो सकता है। रिज और वन भूमि पूरी तरह बाहर है, सिवाय एक सँकरे और भारी शर्तों वाले अपवाद के — 01.08.1990 से पहले स्वीकृत फार्महाउस।
अब कौन-से नियम लागू हैं
एमपीडी–2047 लो-डेन्सिटी एरिया में आवासीय उपयोग परिसर के लिए ये डेवलपमेंट कंट्रोल नॉर्म्स तय करता है:
इन सबको साथ पढ़िए तो जो बनता है वह है — एक नीचा, फैला हुआ भवन, सीमा से काफ़ी पीछे हटकर, ऐसे प्लॉट पर जिसका बड़ा हिस्सा हरा ही रहेगा। ज़ाहिर है, बेल्ट का इच्छित स्वरूप यही है।
वे आँकड़े जो शायद आपको दिखाए गए हों
600 वर्ग मीटर, 4,000 वर्ग मीटर और 10,000 वर्ग मीटर की तीन-स्तरीय प्लॉट श्रेणियों वाली संरचना प्रॉपर्टी चर्चाओं में ख़ूब फैली। वह संरचना प्लान के ड्राफ़्ट दौर की है और अधिसूचित दस्तावेज़ में नहीं आती — अधिसूचित दस्तावेज़ हर उपयोग परिसर पर एक ही समान न्यूनतम 10,000 वर्ग मीटर लगाता है।
अगर आपको दी गई सामग्री 600 वर्ग मीटर की शुरुआत बताती है, तो वह अधिसूचना से पहले की है। उस पर भरोसा करने से पहले राजपत्र का संदर्भ माँगिए।
एक एकड़ का सवाल
यह सवाल हमसे सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, इसलिए इसका सीधा जवाब बनता है।
एक एकड़ लगभग 4,047 वर्ग मीटर होता है। लो-डेन्सिटी एरिया में आवासीय उपयोग परिसर के लिए न्यूनतम प्लॉट एरिया 10,000 वर्ग मीटर है। इसलिए अकेली एक एकड़ की होल्डिंग थ्रेशोल्ड से लगभग 60% कम पड़ती है, और नॉर्म्स को देखते हुए वह नए आवासीय निर्माण को सहारा नहीं देती।
ऐसी स्थिति वाले मालिक के लिए व्यावहारिक रास्ते ये हैं:
- ज़मीन जोड़ें। लगातार एक हेक्टेयर तक पहुँचने के लिए साथ लगी ज़मीन ख़रीदें या पड़ोसियों के साथ मिलकर काम करें। यह पूरी तरह इस पर निर्भर है कि आसपास की ज़मीन किसकी है और वे सौदा करेंगे या नहीं — और इसी वजह से वह ज़मीन जो ब्लॉक पूरा करती है, असली मोल रखती है।
- रखें और बनाए रखें। अगर पहले से कोई स्वीकृत निर्माण है, तो प्लान कहता है कि वह अपनी पुरानी स्वीकृत नॉर्म्स के भीतर बना रहेगा। इससे उपयोग बचता है — पर नीचे दिया गया पुनर्निर्माण वाला हिस्सा ज़रूर पढ़ें।
- दूसरे उपयोग देखें। लो-डेन्सिटी एरिया में संस्थागत, मनोरंजक, वेयरहाउसिंग और कमर्शियल उपयोग परिसर भी हैं — पर उन सब पर भी 10,000 वर्ग मीटर की वही शर्त है, इसलिए यह एक हेक्टेयर से छोटी ज़मीन की समस्या हल नहीं करता। हाँ, जोड़ी हुई होल्डिंग किस काम के लिए सार्थक है, यह ज़रूर बदल सकता है।
- बेचें। इसके कर, उत्तराधिकार और पारिवारिक नतीजे होते हैं, जिन पर निर्णय के बाद नहीं, पहले विशेषज्ञ सलाह चाहिए।
एक सँकरी सुरक्षा जान लेने लायक है। जहाँ मालिक सड़कों या सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के लिए ज़मीन देता है और उस वजह से बची ज़मीन 10,000 वर्ग मीटर से नीचे चली जाती है, वहाँ प्लान कहता है कि यह कमी डेवलपमेंट परमिशन की पात्रता पर असर नहीं डालेगी और एफएआर मूल प्लॉट एरिया पर गिना जाएगा। इसे सँकरे अर्थ में पढ़िए: यह उस प्लॉट को बचाता है जो ज़मीन देने की वजह से थ्रेशोल्ड से नीचे गया। देखने में यह उस प्लॉट को नहीं बचाता जो पहले से ही नीचे था।
अगर आपका फार्महाउस पहले से है
प्लान जारी रखने और दोबारा बनाने के बीच साफ़ लकीर खींचता है।
जारी रखना। निजी ज़मीनों पर अधिसूचना की तारीख तक के मौजूदा स्वीकृत निर्माण अपनी पुरानी स्वीकृत नॉर्म्स के भीतर बने रहेंगे। कोई ख़ास ढाँचा इस दायरे में आता है या नहीं, यह रिकॉर्ड का सवाल है — वह स्वीकृत हुआ था या नहीं, कब, किसके द्वारा, किन नॉर्म्स के तहत — और इसका जवाब आम तौर पर नहीं दिया जा सकता।
दोबारा बनाना। कोई भी भवन या संपत्ति जो पुनर्निर्माण या पुनर्विकास चुनती है, उसे मौजूदा डेवलपमेंट कंट्रोल नॉर्म्स का पालन करना होगा। 10,000 वर्ग मीटर से कम रखने वाले के लिए इसका साफ़ मतलब कहने लायक है: ढाँचा बनाए रखा जा सकता है, पर पूरा पुनर्निर्माण मौजूदा थ्रेशोल्ड पूरी करने पर ही होगा।
नियमितीकरण। कोई भी मौजूदा निर्माण डेवलपमेंट कंट्रोल खंड की सभी नॉर्म्स पूरी करने पर, जुर्माना और अन्य अपेक्षित शुल्क देकर नियमितीकरण के योग्य हो सकता है। यह शर्तों के साथ है, माफ़ी नहीं — और उन शर्तों में न्यूनतम प्लॉट एरिया तथा 18 मीटर राइट ऑफ वे दोनों शामिल हैं।
रिज, वन और रीजनल पार्क की ज़मीन। ये इलाक़े एलडीए प्रावधानों से बाहर हैं, सिवाय उन फार्महाउसों के जो 01.08.1990 से पहले स्वीकृत हुए, या बाद में संबंधित नगर निकाय द्वारा मौजूदा फार्महाउसों के नियमितीकरण के लागू प्रावधानों के तहत मंज़ूर किए गए — और वे भी उच्चतम न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) तथा दिल्ली सरकार के रिज मैनेजमेंट बोर्ड की क्लीयरेंस के अधीन। यह विशेषज्ञ क़ानूनी क्षेत्र है, कोई सामान्य अनुपालन क़दम नहीं।
सड़क की पहुँच — असली द्वारपाल
ध्यान प्लॉट के आकार पर जाता है। नतीजे ज़्यादा सड़क की चौड़ाई तय करती है।
लो-डेन्सिटी एरिया के हर उपयोग परिसर के लिए न्यूनतम 18 मीटर सामने का राइट ऑफ वे चाहिए। बसी हुई बेल्ट के बड़े हिस्से में — ख़ासकर छतरपुर, सतबरी, सुल्तानपुर, जौनापुर और घिटोरनी की पुरानी गलियों में — असली रास्ते इससे काफ़ी सँकरे हैं।
प्लान का उपाय सामूहिक है। जहाँ कोई मौजूदा प्लॉट ऐसी सड़क पर है जिसका राइट ऑफ वे निर्धारित चौड़ाई से कम है, वहाँ उस गली के सभी भू-स्वामी पहुँच की शर्तें पूरी करने के लिए अपेक्षित ज़मीन देंगे, और बदले में मूल प्लॉट एरिया का एफएआर तथा ग्राउंड कवरेज बची हुई ज़मीन पर इस्तेमाल हो सकेगा।
एक गली पर एक भी अनिच्छुक मालिक उस पूरी गली के हर प्लॉट को रोक सकता है। ज़मीन आँकने से पहले उसकी गली आँकिए।
व्यावहारिक रूप से इसका मतलब है कि पहली साइट विज़िट में असली कैरिजवे और उसके दोनों ओर उपलब्ध ज़मीन नापी जानी चाहिए, और पहली बातचीत इस पर होनी चाहिए कि उस गली पर और कौन है। जो ज़मीन काग़ज़ पर बिल्कुल सही है पर 9 मीटर की गली पर बैठी है और पड़ोसी तैयार नहीं — वह आज बनाने लायक ज़मीन नहीं है।
ड्यू डिलिजेंस चेकलिस्ट
इस पेज से और कुछ न लें तो यह क्रम ले लीजिए। इसे इस तरह लगाया गया है कि जो सबसे सस्ते सवाल सौदा ख़त्म कर सकते हैं, वे सबसे पहले पूछे जाएँ।
कोई भुगतान करने से पहले
- राजस्व गाँव और खसरा नंबर पहचानिए। देखिए कि वह गाँव अनुबंध 17 की दो सूचियों में से किसी में है या नहीं।
- परतें जाँचिए। क्या वह गाँव उन पाँच में है जिन पर उच्चतम न्यायालय की शर्तें लागू हैं? क्या उस पर रीजनल पार्क की कटौती है? क्या ज़मीन का कोई हिस्सा अधिसूचित रिज, वन या रीजनल पार्क में आता है?
- अपवाद ख़ारिज कीजिए। लाल डोरा और विस्तारित लाल डोरा, चिह्नित या नियमित अनधिकृत कॉलोनियाँ, मास्टर प्लान सड़क या यूटिलिटी के राइट ऑफ वे, स्मारक-संरक्षित क्षेत्र, पहले से किसी मंज़ूर सरकारी स्कीम में शामिल ज़मीन, नियमितीकरण के अधीन पहले से मौजूद संस्थान।
- रक़बा नापिए। क्या होल्डिंग अकेले 10,000 वर्ग मीटर तक पहुँचती है, या जोड़ना पड़ेगा? अगर जोड़ना है, तो साथ लगी ज़मीन किसके नियंत्रण में है?
- सड़क नापिए। ज़मीन पर असली राइट ऑफ वे, और यह व्यावहारिक राय कि गली 18 मीटर तक पहुँच सकती है या नहीं।
दस्तख़त करने से पहले
- अपना अधिवक्ता नियुक्त कीजिए — टाइटल सर्च, राजस्व रिकॉर्ड की जाँच, उत्तराधिकार और भार के सत्यापन के लिए। उनका कर्तव्य केवल आपके प्रति होना चाहिए।
- सर्वे और सीमांकन कराइए। ज़मीन पर सीमाएँ और रिकॉर्ड में सीमाएँ बेचने वालों की उम्मीद से कहीं ज़्यादा बार अलग निकलती हैं।
- क़ब्ज़ा स्थापित कीजिए। किरायेदारी, आधिपत्य, अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण — सब जीवित मुद्दे हैं, और क़ब्ज़े की जाँच स्वामित्व से अलग होती है।
- मंज़ूरी का इतिहास देखिए — किसी भी मौजूदा ढाँचे के लिए: मंज़ूरी की तारीख, मंज़ूर करने वाली अथॉरिटी, और किन नॉर्म्स के तहत मंज़ूर हुआ।
- अनुमेयता की पुष्टि संबंधित अथॉरिटी से कराइए — जिस उपयोग का इरादा है उसके लिए, जहाँ तक हो सके लिखित में।
- अपनी कर और उत्तराधिकार सलाह लीजिए — होल्डिंग की संरचना पर, निष्पादन के बाद नहीं, पहले।
छह महँगी ग़लतफ़हमियाँ
- "मास्टर प्लान कहता है कि मैं बना सकता हूँ।" मास्टर प्लान ढाँचा है, अनुमति नहीं। साइट-स्पेसिफिक परमिशन अथॉरिटी से आती है और उसकी अपनी जाँच होती है।
- "न्यूनतम 600 वर्ग मीटर है।" वह आँकड़ा ड्राफ़्ट दौर का है। अधिसूचित नॉर्म्स हर उपयोग परिसर पर 10,000 वर्ग मीटर लगाती हैं।
- "सड़क बाद में ठीक करा लेंगे।" 18 मीटर की शर्त सामूहिक है और गली के हर मालिक की ज़रूरत पड़ती है। "बाद में" ही वह समय है जब यह सबसे कठिन होता है।
- "कृषि भूमि है, इसलिए सुरक्षित है।" कृषि वर्गीकरण न तो निर्माण-योग्यता के बारे में कुछ कहता है, न टाइटल, उत्तराधिकार या क़ब्ज़े के बारे में।
- "मेट्रो पास है, इसलिए सघनता बढ़ेगी।" प्लान लो-डेन्सिटी एरिया के गाँवों को ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट से, और अलग से हाई-डेन्सिटी कॉरिडोर से भी, स्पष्ट रूप से बाहर रखता है। ट्रांजिट पास होने से इस बेल्ट पर टीओडी नॉर्म्स नहीं आ जातीं।
- "बाद में नियमित करा लेंगे।" प्लान के तहत नियमितीकरण सभी मौजूदा नॉर्म्स पूरी करने और जुर्माना देने पर ही होता है। एक हेक्टेयर से छोटे प्लॉट पर, या 18 मीटर पहुँच के बिना खड़ा ढाँचा वह शर्त पूरी नहीं करता।
अगर ज़मीन काम की न निकले
कभी-कभी ईमानदार जवाब यही होता है कि कोई ख़ास ज़मीन वह नहीं कर पाएगी जो ख़रीदार चाहता है। इस नतीजे तक धीरे नहीं, जल्दी पहुँचना बेहतर है। जहाँ आवासीय निर्माण संभव नहीं, वहाँ आम तौर पर ये विकल्प देखने लायक होते हैं:
- ज़मीन जोड़ना, ताकि थ्रेशोल्ड तक पहुँचा जा सके — जहाँ पड़ोस का स्वामित्व ढाँचा इसकी इजाज़त दे
- कोई दूसरा उपयोग परिसर जोड़ी हुई होल्डिंग पर — संस्थागत, मनोरंजक, वेयरहाउसिंग या कमर्शियल, जिनमें से हर एक की अनुमेय सघनता इस बेल्ट में आवासीय से काफ़ी ज़्यादा है
- कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियाँ, जिन्हें प्लान पूरे लो-डेन्सिटी एरिया में आधार रूप में अनुमति देता है
- सोलर फ़ार्म, जो प्लान की तालिका में कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स उपयोग परिसर की अनुमेय गतिविधियों में दर्ज है — कम सघनता वाली होल्डिंग रणनीति के रूप में
- कोई दूसरी ज़मीन — वह जो थ्रेशोल्ड पूरी करती है, न कि वह जिसके लिए थ्रेशोल्ड बदलनी पड़े
यह पेज दिशा है, सलाह नहीं
यहाँ कुछ भी क़ानूनी, वित्तीय या कर सलाह नहीं है, न किसी ज़मीन पर कोई निर्णय, न कोई प्रस्ताव। हम रिटर्न, मूल्यवृद्धि या किसी भी तरह के वित्तीय नतीजे के बारे में कोई दावा नहीं करते, और कोई अप्रूवल या परमिशन न हमारी ओर से, न किसी और की ओर से वादा किया जा सकता है।
लैंड यूज़, अनुमेयता, ज़ोनिंग, टाइटल, उत्तराधिकार, भार, राजस्व रिकॉर्ड, सर्वे सीमाएँ, पर्यावरणीय अपेक्षाएँ और हर अप्रूवल — किसी भी निर्णय, भुगतान या प्रतिबद्धता से पहले संबंधित सरकारी अथॉरिटी और योग्य पेशेवरों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित कराए जाने चाहिए।
स्रोत और समीक्षा
अंतिम समीक्षा: 15 सितंबर 2026 — एमपीडी–2047 के अधिसूचित पाठ से मिलान करके। डीडीए जब भी इस विषय से जुड़े रेगुलेशन, संशोधन या स्पष्टीकरण जारी करेगा, हम यह पेज दोबारा जाँचेंगे।
- भारत का राजपत्र, असाधारण — एमपीडी–2047, का.आ. 4597(अ), 20 अगस्त 2026 (हिंदी, डीडीए के माध्यम से)
- वही अधिसूचना — अंग्रेज़ी पाठ (डीडीए के माध्यम से)
- डीडीए — मास्टर प्लान फ़ॉर दिल्ली 2047 पेज
- डीडीए — एमपीडी–2047 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (अंग्रेज़ी)
- डीडीए — दिल्ली का भूमि उपयोग प्लान 2047 (पीडीएफ़)
- अधिसूचित पीडीएफ़ का हमारा अध्याय-वार इंडेक्स (अंग्रेज़ी)
डीडीए के नक्शे और प्लान सिर्फ़ संदर्भ के लिए हैं; इनसे मालिकाना हक़, स्वामित्व या खसरे की सीमा तय नहीं होती। कोई जानकारी पुरानी लगे? हमें व्हाट्सऐप पर बताएँ।
सामान्य प्रश्न
कृषि वर्गीकरण अपने आप निर्माण की अनुमति नहीं देता। ज़मीन लो-डेन्सिटी एरिया के 70 राजस्व गाँवों में से किसी में होनी चाहिए, आवासीय उपयोग परिसर की नॉर्म्स पूरी करनी होंगी — 10,000 वर्ग मीटर न्यूनतम प्लॉट और 18 मीटर सामने का राइट ऑफ वे — और किसी अपवाद में नहीं आनी चाहिए।
उसके बाद भी साइट-स्पेसिफिक परमिशन संबंधित अथॉरिटी से ही लेनी होगी। कृषि भूमि होना टाइटल, उत्तराधिकार या क़ब्ज़े के बारे में भी कुछ नहीं बताता।
10,000 वर्ग मीटर, यानी लगभग 2.47 एकड़ — साथ में न्यूनतम 18 मीटर सामने का राइट ऑफ वे। यह न्यूनतम लो-डेन्सिटी एरिया के हर उपयोग परिसर पर एक समान लागू है, केवल आवासीय पर नहीं।
प्लान कहता है कि निजी ज़मीनों पर अधिसूचना की तारीख तक के मौजूदा स्वीकृत निर्माण अपनी पुरानी स्वीकृत नॉर्म्स के भीतर बने रहेंगे। कोई ख़ास ढाँचा इसमें आता है या नहीं, यह रिकॉर्ड का सवाल है — वह स्वीकृत था या नहीं, कब, किसके द्वारा, किन नॉर्म्स के तहत।
ध्यान दें कि छतरपुर उन पाँच गाँवों में है जिन पर उच्चतम न्यायालय के आदेशों से उपजी शर्तें लागू हैं, और बेल्ट के कुछ हिस्सों पर रीजनल पार्क या रिज की परतें भी हैं। इन पर विशेष सत्यापन ज़रूरी है।
अकेले नहीं। एक एकड़ लगभग 4,047 वर्ग मीटर है, जबकि न्यूनतम 10,000 वर्ग मीटर चाहिए — यानी लगभग 60% कम।
रास्ते ये हैं: साथ लगी ज़मीन जोड़कर एक हेक्टेयर तक पहुँचना; अगर पहले से स्वीकृत ढाँचा है तो उसे बनाए रखना; या बेचना। ध्यान रहे कि दूसरे उपयोग परिसर भी उसी 10,000 वर्ग मीटर की शर्त के अधीन हैं, इसलिए वे इस समस्या का हल नहीं हैं।
एक ड्वेलिंग यूनिट, साथ में अनुमेय एफएआर के भीतर 30 वर्ग मीटर से कम की दो सर्विस स्टाफ़ यूनिट। कई यूनिट वाला पारिवारिक कंपाउंड अब इस बेल्ट में कल्पना में नहीं है।
दक्षिण में मुख्य रूप से छतरपुर, सतबरी, सुल्तानपुर, जौनापुर, गदईपुर, चंदन हौला, फतेहपुर बेरी, असोला, भाटी, घिटोरनी, रंगपुरी, महरौली, रजोकरी और समालखा। उत्तर में बकोली, हिरनकी, होलंबी खुर्द और बख्तावरपुर। इनके अलावा दिल्ली की सीमा पर ज़ोन जी, जे, के-II, एल, एन, पी-I, पी-II और ई में फैले 47 सीमावर्ती गाँव।
पूरी सूची हमारे लो-डेन्सिटी एरिया पेज पर है।
आवासीय प्लॉट के लिए कुल प्लॉट एरिया का न्यूनतम 50% हरित क्षेत्र, जिसमें कुल प्लॉट एरिया का कम से कम 30% वृक्ष छत्र आवरण के अंतर्गत हो। यह मंज़ूरी के समय की एक बार की शर्त नहीं, प्लॉट के बड़े हिस्से पर स्थायी बंधन है।
इसके साथ ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज, अनिवार्य वर्षा जल संचयन और प्रति व्यक्ति 40 जीपीसीडी जल सीमा जैसी शर्तें भी लागू हैं।
दोनों की भूमिका अलग है, और सवाल यह है कि किसका हित किसके साथ जुड़ा है। ब्रोकर की कमाई सौदा होने पर होती है। किसी भी सलाहकार से यह पूछना चाहिए कि उसकी फ़ीस का आधार क्या है और सौदे में उसका अपना कोई हित है या नहीं — और जवाब लिखित में लेना चाहिए।
टाइटल पर राय किसी ऐसे अधिवक्ता से लीजिए जिसका कर्तव्य केवल आपके प्रति हो, चाहे ज़मीन कोई भी दिखाए।
संबंधित गाइड
कोई फार्महाउस ज़मीन देख रहे हैं?
हमें राजस्व गाँव, खसरा, रक़बा और सामने की सड़क बताइए। हम बताएँगे कि थ्रेशोल्ड पूरी होती है या नहीं, कौन-सी परतें लागू हैं, और आगे बढ़ना सार्थक है या नहीं — अगर नहीं, तो वह भी साफ़ कहेंगे।